हमारा साकेत परिवार

इस महाविद्यालय का जन्म गर्ल्स हाईस्कूल के रूप में 30 अक्टूबर सन् 1996 को मण्डलायुक्त इलाहाबाद मण्डल श्री देशदीपक वर्मा आई.ए.एस. के कर-कमलों द्वारा किये गये शिलान्यास और उनकी प्रेरणा का प्रतिफल था। गर्ल्स हाईस्कूल के रूप में जन्म लेने वाला यह विद्यालय मात्र 2 वर्षों के अन्दर ही मानवीकी वर्ग एवं विज्ञान वर्ग के विभिन्न विषयों से नगर के एक प्रतिष्ठित इण्टरमीडिएट कालेज के रूप में स्थापित हो गया। नगर की माँग और आकांक्षाओं को मूर्त रूप देने के लिए वर्ष 2005 में महामहिम श्री राज्यपाल द्वारा 7 विषयों (हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, प्रा0 इतिहास, समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, राजनीतिशास्त्र) के शिक्षण की अनुमति प्रदान की गई और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के द्वारा बी.ए. पाठ्यक्रम को सम्बद्धता दी गई। जुलाई 2009 में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद उत्तर मध्य क्षेत्र जयपुर द्वारा बी.एड्. पाठ्यक्रम की अनुमति दी गई। 2011 में 3 अतिरिक्त विषयों (भूगोल, संगीत गायन, गृह विज्ञान) एवं वर्ष 2013 में 2 अतिरिक्त विषयों (उर्दू, शारीरिक शिक्षा) के शिक्षण की अनुमति डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद द्वारा प्रदान की गई तथा 01 जुलाई 2013 से परास्नातक स्तर पर (समाजशास्त्र एवं शिक्षाशास्त्र) एवं 30 मई 2019 से परस्नातक स्तर पर (हिन्दी,भूगोल, गृह विज्ञान, प्राचीन इतिहास, उर्दूद्ध सम्बद्धता विश्वविद्यालय द्वारा दी गई। वर्तमान में यह महाविद्यालय प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज से सम्बद्ध है। एक अल्प अवधि में विद्यालय से परास्नातक महाविद्यालय तक बढ़ने की जो गति थी वह आकस्मिक नहीं थी, बल्कि एक दृढ़ संकल्प और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के निवर्तमान अधिष्ठाता शिक्षा संकाय डॉ. रामशकल पाण्डेय एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के अधिष्ठाता शिक्षा संकाय डॉ. एस.पी. त्रिपाठी के एक साकारात्मक सोच का परिणाम थी। साकेत नाम नही एक आन्दोलन है। साकेत शब्द का तात्पर्य है -

Shrine Of Ability Knowledge Education & Truth (SAKET)
अर्थात या यूँ कहे कि संकल्प, कर्तव्य और त्याग सेे लिये गये सा क और त से मिलकर साकेत शब्द की व्युत्पत्ति हुई है। हमारा प्रेरणा स्रोत है सूर्य जो कि सर्वशक्तिमान होते हुए भी सदैव दूसरों की सेवा के लिए उदित होता है और बिना किसी भेद-भाव के सबको ऊर्जा देता है। हमारा लक्ष्य है राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण और युवा पीढ़ी को यह अनुभव कराना कि राष्ट्रधर्म व्यक्तिगत धर्म से ऊपर है।

नगर में महाविद्यालय की पहचान एक सांस्कृतिक केन्द्र के रूप मंे की जाती है। महाविद्यालय का जन्म ही दिनाँक 09 फरवरी 1996 से 16 फरवरी 1996 तक के साँस्कृतिक महोत्सव के गर्भ से हुआ है। साँस्कृतिक महोत्सव के प्राँगण से उत्पन्न यह विद्यालय नित् नये नूतन कीर्तिमान स्थापित करता रहा है, जिसमें गंगा अवतरण, स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा, चुम्बकीय ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा आदि का नवदुर्गा के रूप में अवतरण का चित्रण, दशावतार, जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक के क्षेत्रीय नृत्य के कुछ ऐसे उद्वरण रहे हैं जो अविष्मरणीय छाप नगरवासियों पर छोड़ चुके हैं। आज प्रतापगढ़ में यह उक्ति प्रचलित है कि साकेत नाम नहीं एक संस्कृति है।


हम क्रीड़ा के क्षेत्र में भी अपनी एक अलग पहचान रखते हैं हमारी छात्रा कु0 वर्तिका सिंह ने पिस्टल शूटिंग में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चैम्पियनशिप जीत कर नगर का मान बढ़ाया है। हम अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वाहन में भी कभी पीछे नहीं रहे हैं चाहे वो उत्तराखण्ड की दैवीय आपदा हो या दिल्ली का निर्भयाकाण्ड। निर्भयाकाण्ड में जहाँ हमारी छात्राओं ने कैंडिल मार्च और शांति जुलूसों के द्वारा देश की भावनाओं को आपस में जोड़ा हैं। वहीं उत्तराखण्ड दैवीय आपदा एवं कश्मीर बाढ़ पीड़ितों के लिए क्रमशः 21000/- एवं 30,000/- का योगदान महाविद्यालय परिवार ने प्रेषित किया है। मतदाता जागरूकता के क्षेत्र में नगर के सर्वाधिक मतदाता बनाने के लिए महाविद्यालय को जिलाधिकारी प्रतापगढ़ द्वारा प्रथम स्थान दिया गया है। संस्था की सहयोगी संस्था समर्पण द्वारा दिल्ली के कुछ युवाओं के समूह ॅम ॅंदज ब्ींदहम के बैनर तले संगठित कर चुनाव आयोग एवं राष्ट्रीय सहारा के सहयोगी के रूप में जनादेश 2013 कार्यक्रम में अभूतपूर्व योगदान दिया है। कोविड के त्रासदी काल में हमने छात्राओं को लगातार उर्जावान बनाये रखने के लिए 1000 से अधिक इकोब्रिक्स का निर्माण कराया और अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर 277 पीपल/नीम के पौधे रोपित कराकर एक रिकार्ड स्थापित किया है। हमारी 384 छात्राओं ने कोविड पीड़ितों से सम्पर्क कर उनको सहायता पहुँचाने का कार्य किया और कोविड पीड़ितों के सहायतार्थ निःशुल्क ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर बैंक की स्थापना हेतु राजकीय मेडिकल कॉलेज, प्रतापगढ़ को 05 ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर एवं 10 ब्लोवर प्रदान किया गया। पर्यावरण के प्रति जागरूकता बनाये रखने के लिए एक जू़ की स्थापना कर ग्रीन आडिट सम्पन्न कराया गया।

महाविद्यालय के शुभारम्भ पर मेरे मस्तिष्क में अनेकानेक प्रश्न उठ रहे थे मुझे भय था कि पता नहीं महाविघालय अपने दायित्वों के निर्वहन में सफल हो सकेगा अथवा नहीं किन्तु शिरडी के साई समर्थ की अनुकम्पा से डॉ. श्रीमती नीलिमा श्रीवास्तव प्राचार्या के कुशल नेतृत्व में महाविद्यालय का प्रदर्शन सचमुच सराहनीय रहा। बी. एड. विभाग के शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर सहयोगियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन जितनी कुशलता से किया वह एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पधारें हमारे जनपद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय श्री अली जामिन साहब के इन शब्दों में व्यक्त होती है महाविघालय बहुत से हैं किन्तु इस महाविघालय ने जिस स्तर का प्रदर्शन किया है वो अनुकरणीय है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविघालय के अघिष्ठालय के अघिष्ठाता शिक्षा संकाय डॉ. एस पी त्रिपाठी ने सत्र के अंतिम सेमिनार के अवसर पर आशा व्यक्त की, कि इस महाविघालय के क्रियाकलाप एवं शिक्षण स्तर इतनी उन्नति कर रहा है कि महाविघालय की छात्राएं विश्वविघालय में अपना स्थान बना सकती है। ऐसे ही विचार क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकरी इलाहाबाद डॉ. दुर्गेश शुक्ला के भी इस महाविघालय के बी. एड. विभाग के विषय मे रहें हैं पोस्ट ग्रेजुएट कालेज पट्टी के शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आर के मिश्रा जी ने भी महाविघालय की प्रगति को उल्लेखनीय प्रगति के रूप में रेखांकित किया है। छात्राएं अपनी पूर्ण ऊर्जा के साथ महाविघालय की परम्पराओं को संजोने में लगी रही और एम0ए0 सत्र 2019-21 में 01 गोल्ड, 01 कास्य एवं 03 रजत पदक तथा एम0ए0 सत्र 2020-22 में 01 गोल्ड तथा 03 कास्य तथा बी0ए0 वर्ष 2022 में 01 कास्य पदक प्राप्त किया।

महाविद्यालय परिसर में अब तक प्रो. ए.के. मित्तल कुलपति डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद, प्रो.जी. एन. पाण्डेय कुलपति अरूणाचल राज्य विश्वविद्यालय, प्रो0 राजेन्द्र प्रसाद कुलपति इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय, इलाहाबाद, प्रो. ओमप्रकाश पाण्डेय विजिटंग प्रोफेसर, श्री देशदीपक वर्मा आई.ए.एस. मण्डलाआयुक्त इलाहाबाद मण्डल, इलाहाबाद, प्रमुख सचिव परिवहन उ.प्र. शासन श्री पी.के. झा. आई.ए.एस., श्री आर.एस. वर्मा, आई.ए.एस., सचिव बाल कल्याण एवं महिला विकास, डॉ. ललित वर्मा आई.ए.एस., डॉ. एस.बी.सिंह विशेष कार्यक्रमाधिकारी राष्ट्रीय सेवा योजना, उ0प्र0 शासन, माननीय श्री सीताराम येचुरी सी.पी.एम. राजनेता, माननीय सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह जी, माननीय मंत्री श्री स्वामी प्रसाद मौर्या जी उ0प्र0 शासन, माननीय विधायकगढ़ एवं सदस्य विधान परिषद विन्ध्वासिनी कुमार जी, श्री देवीदयाल शास्त्री जी, श्री हरिप्रताप सिंह जी, श्री नागेन्द्र सिंह जी, निवर्तमान सांसद श्री संगम लाल गुप्ता जी, श्री बृजेश सौरभ, श्री सी.एन. सिंह जी, माननीय श्री कुंवर हरिवंश सिंह जी, एसिड अटैक सरवाइवर श्रीमती लक्ष्मी जी, प्रथम द्वियांग महिला एवरेस्ट विजेता सुश्री अरूणिमा सिन्हा एवं शिक्षक विद्यायक श्री उमेश चन्द्र द्विवेदी जी आदि ने महाविद्यालय के विभिन्न कार्यक्रम में सहभागित की और महाविद्यालय के कार्यक्रमों को हृदय से सराहा गया है।

महाविद्यालय द्वारा छात्राओं को यह अनुभूत दी गई है कि प्रतिभा केवल साधन सम्पन्न और केवल बड़े नगरों की ही मिल्किीयत नहीं है, बल्कि यह साधन विहीन और छोटे नगरों और गाँवों में भी अवतरित हो सकती है, आवश्यकता है तो केवल उन्हें प्रस्फुरित होने के अवसर देने की और इस उद्देश्य को फलीभूति करने के लिए हमने ड्रीम फैक्ट्री का गठन किया है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत अब तक महाविद्यालय मेे श्री हरिप्रसाद चौरसिया, प्राक्टर एण्ड गैम्बल कम्पनी के मुख्यकार्यकारी अधिकारी श्री समीर श्रीवास्तव, डी.आर.डी.ए. कानपुर के वैज्ञानिक डॉ. सर्वेश कुमार श्रीवास्तव एवं इग्नाइटेड माइंस नई दिल्ली के निदेशक प्रो0 अमित सिंह, प्रख्यात मनोवैज्ञानिक डॉ. गिरिजेश श्रीवास्तव द्वारा महाविद्यालय के छात्राओं को प्रेरणा दी जा चुकी है।